केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि किडनी रोग साइलेंट पैंडेमिक बन रहा, समय रहते पहचान और इलाज जरूरी है। वहीं, किडनी वारियर्स फाउंडेशन कॉन्फ्रेंस में गोरखपुर एम्स के चेयरमैन पद्मश्री डॉ. हेमंत कुमार को एक्सीलेंस इन नेफ्रोलॉजी अवार्ड मिला।
किडनी वारियर्स फाउंडेशन ने नई दिल्ली में अपना पहला कॉन्क्लेव 2026 आयोजित किया, जिसमें भारत में नेफ्रोलॉजी के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर क्रॉनिक किडनी डिजीज की बढ़ती चुनौती पर गंभीर चर्चा की गई। कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने किडनी रोग की समय रहते पहचान, बेहतर इलाज और डायलिसिस व ट्रांसप्लांट की सुविधाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया।
कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि क्रॉनिक किडनी डिजीज अब साइलेंट पैंडेमिक का रूप ले रही है और भारत में यह मौत के प्रमुख कारणों में शामिल होती जा रही है। उन्होंने कहा कि किडनी स्वास्थ्य को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में शामिल करना जरूरी है।
जिला अस्पतालों में मुफ्त डायलिसिस सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही
अपने संबोधन में अनुप्रिया पटेल ने सरकार की पहल प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत जिला अस्पतालों में मुफ्त डायलिसिस सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना, नियमित जांच और शुरुआती पहचान को प्रोत्साहित करना तथा डायलिसिस और ट्रांसप्लांट सेवाओं तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित करना है।
कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने किडनी रोगों की जल्दी पहचान, स्वास्थ्य नीतियों में बेहतर समन्वय और तकनीकी नवाचार पर भी चर्चा की। विवेकंदन झा ने कहा कि केवल स्क्रीनिंग शब्द के बजाय अर्ली डिटेक्शन यानी शुरुआती पहचान पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए ताकि जोखिम वाले लोगों को समय पर पहचाना जा सके।
डॉक्टर संजीव गुलाटी ने भी दी मरीजों को सलाह
वहीं डॉक्टर संजीव गुलाटी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, लेकिन जो डॉक्टर एआई का उपयोग नहीं करेंगे वे पीछे छूट सकते हैं। मरीजों के प्रतिनिधियों ने भी किडनी रोग के आर्थिक और मानसिक प्रभावों पर चिंता जताई।
शांतनु साहा ने कहा कि अधिकांश अस्पतालों में डायलिसिस का खर्च करीब 60 हजार रुपये प्रति माह तक पहुंच जाता है, जो कई परिवारों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ है। उन्होंने सरकार से सभी मरीजों को वित्तीय सहायता देने की मांग की।
कॉन्क्लेव के दौरान गोरखपुर एम्स के चेयरमैन पद्मश्री हेमंत कुमार को एक्सीलेंस इन नेफ्रोलॉजी अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. हेमंत कुमार ने किडनी रोगों से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि पर्याप्त पानी पीना, नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखना, धूम्रपान से बचना, नियमित व्यायाम करना और दर्द निवारक दवाओं का सीमित उपयोग किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करता है। साथ ही उन्होंने नियमित किडनी जांच, जैसे क्रिएटिनिन और यूरिन टेस्ट कराने पर जोर दिया। कार्यक्रम में इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलोजी के सेक्रेटरी डॉ. श्याम बंसल सहित कई डॉक्टर, नीति निर्माता और स्वास्थ्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।


