नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनुप्रिया पटेल ने कहा है कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में स्वास्थ्य सेवा सबसे अहम स्तंभ है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि देश का हर नागरिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवा से जुड़े और यही सच्चे अर्थों में विकसित भारत की पहचान होगी। वह भारत 24 के ‘बिल्डिंग भारत लीडरशिप समिट: रोड मैप टू विकसित भारत 2047’ कार्यक्रम में बोल रही थीं।
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि एक आम नागरिक के लिए विकसित भारत की परिभाषा तब पूरी होगी, जब सरकार उसकी दहलीज पर हो और उसके जीवन में वास्तविक बदलाव आए। उन्होंने कहा कि जीवन में बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच है। उन्होंने कहा कि सरकार इसी दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने सामूहिक प्रयास की अवधारणा (होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच) के तहत काम करना शुरू किया है। उन्होंने बताया कि स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए सिर्फ स्वास्थ्य मंत्रालय ही नहीं, बल्कि अन्य मंत्रालय भी मिलकर काम कर रहे हैं। गरीबों के लिए आवास, शौचालय, बिजली, शुद्ध पेयजल और स्वच्छ ईंधन जैसी योजनाओं से लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि नेट जीरो कार्बन मिशन जैसे प्रयास भी अप्रत्यक्ष रूप से बेहतर स्वास्थ्य में योगदान दे रहे हैं।
रोकथाम पर जोर, बीमारी का इलाज नहीं
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति सरकार का दृष्टिकोण बदल गया है। अब केवल बीमारी का इलाज करना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि बीमारी को होने से रोकना (प्रिवेंटिव केयर) सबसे पहला कदम है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में भी यही प्राथमिकता तय की गई है। ‘ईट राइट इंडिया’ और ‘स्टॉप ओबेसिटी’ अभियान इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। उन्होंने लोगों से अपने दैनिक आहार में तेल, चीनी और नमक की मात्रा कम करने की अपील की।
टीकाकरण कार्यक्रम का विस्तार
मंत्री ने बताया कि सरकार ने सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम को मजबूत किया है। पहले जहां इस कार्यक्रम में केवल 5 वैक्सीन शामिल थीं, वहीं अब 11 वैक्सीन दी जा रही हैं। हर साल ढाई करोड़ बच्चों और करीब 2 करोड़ 90 लाख गर्भवती महिलाओं को यह लाभ मिल रहा है। उन्होंने हाल ही में 28 फरवरी को शुरू की गई एचपीवी वैक्सीन का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 14 साल की करीब 1 करोड़ 20 लाख बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर यह टीका नि:शुल्क लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है और WHO द्वारा मान्यता प्राप्त है, और दुनिया के 160 देशों में इसे लगाया जा रहा है।
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भारत की सफलता
अनुप्रिया पटेल ने टीकाकरण कार्यक्रम और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं का परिणाम बताते हुए कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। उन्होंने कहा कि दुनिया में मातृ मृत्यु दर में 48% की गिरावट हुई है, जबकि भारत में यह गिरावट 86% की दर से हुई है। इसी तरह, विश्व स्तर पर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 61% की गिरावट है, जबकि भारत में यह 76% है। नवजात मृत्यु दर में भारत ने 70% की गिरावट दर्ज की है, जबकि वैश्विक गिरावट 54% है।
जांच और अर्ली डायग्नोसिस पर जोर
उन्होंने बताया कि बीमारी की रोकथाम में समय पर जांच (अर्ली डायग्नोसिस) की अहम भूमिका है। इसके लिए देशभर में 1.80 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर 30 वर्ष से अधिक उम्र के सभी व्यक्तियों की डायबिटीज, हाइपरटेंशन और तीन प्रमुख कैंसर (ओरल, ब्रेस्ट और सर्वाइकल) की जांच शुरू की गई है। करोड़ों लोगों की समय रहते जांच हो रही है और उन्हें इलाज भी मिल रहा है।
स्वास्थ्य अवसंरचना में बड़ा विस्तार
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार स्वास्थ्य अवसंरचना को भी मजबूत कर रही है। अनुप्रिया पटेल ने बताया कि पिछले 10-12 वर्षों में देश में बड़ी संख्या में नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। एमबीबीएस और पीजी की सीटों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। इसके अलावा, नर्सिंग कॉलेजों का भी विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाल के बजट में अगले पांच साल में एक लाख एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे डॉक्टरों पर काम का बोझ कम होगा और मरीजों को बेहतर देखभाल मिल सकेगी।
डिजिटल स्वास्थ्य सेवा में भारत अग्रणी
मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा में डिजिटल टूल्स के इस्तेमाल में भारत दुनिया में अग्रणी बनकर उभरा है। उन्होंने ‘यू-विन’ पोर्टल का उदाहरण देते हुए बताया कि इससे टीकाकरण के हर सत्र पर नजर रखी जा रही है और पूर्ण टीकाकरण कवरेज 98.7% तक पहुंच गया है। कोविड काल में ‘कोविन’ और ई-संजीवनी (नेशनल टेलीमेडिसिन नेटवर्क) जैसे प्लेटफॉर्म ने दूरदराज के मरीजों को भी विशेषज्ञों से जोड़ा। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि एआई टूल्स की मदद से अलग-अलग भाषाओं में डिजिटल न्यूज का विश्लेषण करके बीमारियों के प्रकोप का पहले ही अनुमान लगाया जा रहा है, जिससे उन्हें रोकने में मदद मिल रही है। टीबी मुक्त भारत अभियान में भी एआई पावर्ड टूल्स का उपयोग किया जा रहा है, जिससे बिना लक्षण वाले मरीजों की भी पहचान हो पा रही है।
सामूहिक प्रयास से ही साकार होगा लक्ष्य
अपने संबोधन के अंत में अनुप्रिया पटेल ने कहा कि स्वस्थ भारत बनाना एक साझा जिम्मेदारी है। सरकार के प्रयासों के साथ-साथ सभी हितधारकों के सहयोग से ही ‘स्वस्थ भारत, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत’ का संकल्प साकार हो सकता है। उन्होंने सभी से इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आगे आने का आह्वान किया।


